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  • बीज उपचार – बुवाई से पहले की समझदारी और सफल उत्पादन की पहली सीढ़ी

    बीज उपचार – बुवाई से पहले की समझदारी और सफल उत्पादन की पहली सीढ़ी

    Posted on : 09 Feb 2026 By : Agri Search (India) Pvt. Ltd

    बीज उपचार – बुवाई से पहले की समझदारी और सफल उत्पादन की पहली सीढ़ी

    कृषि में उत्पादन बढ़ाने के लिए हम उर्वरक, पानी और छिड़काव पर अधिक ध्यान देते हैं; लेकिन बुवाई से पहले किया गया एक छोटा-सा परंतु अत्यंत महत्वपूर्ण उपाय है बीज उपचार। सही विधि से बीज उपचार करने पर अंकुरण क्षमता बढ़ती है, पौधे मजबूत बनते हैं और पूरे मौसम के लिए फसल की मजबूत नींव तैयार होती है। इसलिए बीज उपचार के उद्देश्य और तरीकों को किसानों द्वारा स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।

    बीज उपचार का महत्व और उद्देश्य

    बीज उपचार का मुख्य उद्देश्य बीजों का तेज और एकसमान अंकुरण, मिट्टी से होने वाले रोगों से संरक्षण, प्रारंभिक कीटों के प्रकोप से बचाव तथा जड़ों की स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित करना है। उचित बीज उपचार से फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आगे चलकर रासायनिक उर्वरकों एवं दवाओं का उपयोग कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इससे लागत घटती है और उत्पादन में स्थायी वृद्धि होती है।

    बीज उपचार के प्रकार

    पानी द्वारा बीज प्राइमिंग (Hydro-Priming)
    स्वच्छ पानी में निर्धारित समय तक बीज भिगोकर, उन्हें छाया में सुखाकर बुवाई करने से अंकुरण जल्दी और एकसमान होता है। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह विधि उपयोगी सिद्ध होती है।

    पोषक तत्व प्राइमिंग (Nutri-Priming)
    जिंक, बोरॉन, मोलिब्डेनम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के घोल में बीज उपचार करने से प्रारंभिक वृद्धि में सुधार होता है और पोषक तत्वों की कमी से बचाव होता है।

    जैविक बीज उपचार (Bio-Priming)
    ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, बैसिलस KONCERT जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीवों द्वारा बीज उपचार करने से मिट्टी जनित रोगों पर प्राकृतिक नियंत्रण मिलता है, जड़ों की वृद्धि बेहतर होती है और फसल का जोश बढ़ता है।

    रासायनिक बीज उपचार (Pesticide-Priming)
    जहाँ रोग या कीटों का प्रकोप अधिक होने की संभावना हो, वहाँ अनुशंसित फफूंदनाशकों और कीटनाशकों से बीज उपचार आवश्यक होता है। इससे बीज सड़न, उखटा रोग तथा अंकुरण न होने जैसी समस्याओं से बचाव होता है।

    जैविक उत्तेजकों के साथ बीज प्राइमिंग (PGR / Biostimulant-Priming)
    ह्यूमिक और फुल्विक अम्ल, अमीनो अम्ल जैसे जैविक उत्तेजकों के उपयोग से पौधे प्रारंभ से ही सशक्त बनते हैं, जड़ें गहराई तक विकसित होती हैं और तनाव सहनशीलता बढ़ती है।

    संयुक्त बीज उपचार के लाभ

    कई फसलों में एक से अधिक प्रकार के बीज उपचार एक साथ करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, इन उपचारों को सही क्रम और संतुलित तरीके से करना अत्यंत आवश्यक है।

    निष्कर्ष

     

    बीज उपचार कृषि का एक छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावी उपाय है। “बूंद-बूंद से घड़ा भरता है” इस कहावत की तरह, बीज उपचार के सटीक और वैज्ञानिक उपाय उत्पादन बढ़ाने में बड़ा योगदान देते हैं। परिस्थितियों के अनुसार सही बीज उपचार अपनाने से सफल, टिकाऊ और लाभदायक खेती निश्चित रूप से संभव है।