भारी धातु – मिट्टी, फसलों और मानव स्वास्थ्य पर होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव
आज कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर लेकिन अक्सर उपेक्षित विषय है भारी धातु (Heavy Metals)। कैडमियम (Cd), सीसा (Pb), आर्सेनिक (As), पारा (Hg), क्रोमियम (Cr) और निकल (Ni) जैसे भारी धातु जैव-अपघटनीय नहीं होते। एक बार जब ये मिट्टी में प्रवेश कर जाते हैं, तो वर्षों तक नष्ट हुए बिना जमा होते रहते हैं और धीरे-धीरे संपूर्ण मृदा तंत्र को प्रदूषित करते हैं।
भारी धातु और मिट्टी का स्वास्थ्य
भारी धातुओं का सबसे पहला और गंभीर प्रभाव मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ये धातु मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या और उनकी कार्यक्षमता को कम कर देते हैं। परिणामस्वरूप जैविक पदार्थों का अपघटन धीमा हो जाता है, नाइट्रोजन-फॉस्फोरस चक्र बाधित होता है और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घटती है। माइकोराइजा तथा अन्य उपयोगी सूक्ष्मजीवों के साथ सहजीवी संबंध समाप्त हो जाते हैं, जिससे मिट्टी धीरे-धीरे निर्जीव बनने लगती है।
फसलों पर भारी धातुओं का प्रभाव
भारी धातुओं का प्रभाव पौधों पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। अधिक मात्रा में भारी धातुओं की उपस्थिति से जड़ों की वृद्धि रुक जाती है, पोषक तत्वों का अवशोषण बाधित होता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कम हो जाती है। फसलों में पीलापन (क्लोरोसिस), वृद्धि में कमी, पत्तियों का गिरना तथा गंभीर स्थिति में पौधों की मृत्यु तक हो सकती है।
ऑक्सीडेटिव तनाव और उत्पादन पर प्रभाव
भारी धातुओं के कारण पौधों में ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) उत्पन्न होता है। इससे Reactive Oxygen Species (ROS) की मात्रा बढ़ जाती है, जो एंजाइमों की कार्यक्षमता को कम करती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है। इसका सीधा प्रभाव फसल उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है।
मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
भारी धातु खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव और पशुओं के शरीर में प्रवेश करते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से यकृत, गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और हृदय पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कैंसर, न्यूरोलॉजिकल विकार, हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
सबसे खतरनाक भारी धातु कौन-से हैं
कैडमियम, सीसा, आर्सेनिक, पारा और क्रोमियम अत्यंत विषैले भारी धातु माने जाते हैं। तांबा (Cu) और जस्ता (Zn) आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व होते हुए भी यदि अधिक मात्रा में मौजूद हों, तो वे भी पौधों और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। इसलिए मिट्टी, पानी, उर्वरक और कृषि इनपुट्स में भारी धातुओं का प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
मिट्टी, फसल और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। भारी धातुओं के प्रदूषण को रोकना, नियमित मिट्टी परीक्षण करना, जैविक पदार्थों का उपयोग बढ़ाना और सुरक्षित कृषि पद्धतियाँ अपनाना आज की आवश्यकता है।
स्वस्थ मिट्टी = स्वस्थ फसल = स्वस्थ मानव