Apical Dominance (शीर्ष प्राबल्य) – अधिक शाखाओं से अधिक उत्पादन
कृषि में अधिक उत्पादन के लिए केवल उर्वरक और सिंचाई ही नहीं, बल्कि पौधों की वृद्धि प्रक्रिया को समझना भी आवश्यक है। पौधे में शाखाओं की संख्या और उनकी सक्रियता उपज पर सीधा प्रभाव डालती है। इसी संदर्भ में Apical Dominance एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
एपिकल डॉमिनेंस क्या है?
कई फसलों में पौधा सीधा ऊपर की ओर बढ़ता है और पार्श्व शाखाएँ कम विकसित होती हैं। इस स्थिति को एपिकल डॉमिनेंस कहा जाता है। पौधे की शीर्ष कली पूरे पौधे की वृद्धि को नियंत्रित करती है।
वैज्ञानिक कारण
एपिकल डॉमिनेंस का मुख्य कारण ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन है। यह हार्मोन शीर्ष कली में बनता है और नीचे की ओर जाकर पार्श्व कलियों की वृद्धि को रोकता है। इससे पौधा लंबा होता है, लेकिन शाखाएँ कम बनती हैं।
उत्पादन से संबंध
अरहर, चना और कपास जैसी फसलों में अधिक शाखाएँ होने से अधिक फूल, फलियाँ और बोंडे बनते हैं। इसलिए इन फसलों में एपिकल डॉमिनेंस को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक होता है।
टॉपिंग या पिंचिंग का महत्व
सही अवस्था में शीर्ष कली हटाने से ऑक्सिन का प्रभाव कम हो जाता है और पार्श्व कलियाँ सक्रिय हो जाती हैं। इससे पौधा फैलता है, पोषक तत्वों का बेहतर वितरण होता है और उपज में वृद्धि होती है।
प्रबंधन उपाय
बड़े क्षेत्र में यांत्रिक टॉपिंग, उचित पौध दूरी, संतुलित नाइट्रोजन प्रबंधन और जैव-उत्तेजकों का उपयोग किया जाता है। सही प्रबंधन से अधिक उत्पादन देने वाले पौधे विकसित किए जा सकते हैं।