क्षारीय मिट्टी और उसका सुधार
कई खेतों में सही उर्वरक और पानी प्रबंधन होने के बावजूद उत्पादन कम मिलता है। इसका एक प्रमुख कारण क्षारीय (Alkaline) मिट्टी होता है। सही जानकारी और वैज्ञानिक उपाय अपनाने से ऐसी मिट्टी को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है।
क्षारीय मिट्टी क्या होती है
जिस मिट्टी का pH 8.5 से अधिक होता है तथा जिसमें
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एक्सचेंजेबल सोडियम (Na⁺) की मात्रा अधिक हो
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कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी हो
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मिट्टी कठोर, चिपचिपी और पानी न सोखने वाली हो
ऐसी मिट्टी को क्षारीय या सोडिक मिट्टी कहा जाता है।
क्षारीय मिट्टी की प्रमुख विशेषताएँ
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pH सामान्यतः 8.5 से 10.0
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मिट्टी की संरचना खराब और जल निकास कमजोर
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जड़ों को ऑक्सीजन कम मिलती है
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आयरन, जिंक, मैंगनीज की कमी
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फसल की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन घटता है
क्षारीय मिट्टी फसलों के लिए हानिकारक क्यों होती है
अधिक सोडियम के कारण मिट्टी की संरचना नष्ट हो जाती है। पानी और हवा का संचार रुक जाता है, पोषक तत्व उपलब्ध नहीं हो पाते और अंततः उत्पादन में भारी कमी आती है।
क्षारीय मिट्टी सुधारने के उपाय
1) जिप्सम का उपयोग
जिप्सम मिट्टी में मौजूद अतिरिक्त सोडियम को हटाकर कैल्शियम उपलब्ध कराता है। जिप्सम की मात्रा मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार ही तय करनी चाहिए।
2) जैविक पदार्थों का अधिक उपयोग
गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना और जैविक क्रियाशीलता में सुधार होता है।
3) सल्फर एवं सल्फरयुक्त उर्वरक
इनके प्रयोग से मिट्टी का pH धीरे-धीरे कम होता है और सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं।
4) उचित जल एवं ड्रेनेज प्रबंधन
जिप्सम देने के बाद लीचिंग आवश्यक है। साथ ही, खेत में उचित जल निकास व्यवस्था होना बहुत जरूरी है।
5) सहनशील फसलों का चयन
धान, जौ, सोडियम सहनशील गेहूं की किस्में, कपास और गन्ना जैसी फसलें उपयुक्त रहती हैं।
6) सूक्ष्म पोषक तत्वों का पत्तियों पर छिड़काव
आयरन, जिंक और मैंगनीज का फोलियर स्प्रे अधिक प्रभावी रहता है।
निष्कर्ष
क्षारीय मिट्टी नापीक नहीं होती। मिट्टी परीक्षण, सही सुधारात्मक उपाय और धैर्य के साथ ऐसी मिट्टी को धीरे-धीरे उपजाऊ बनाया जा सकता है। टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी सुधार सबसे महत्वपूर्ण आधार है।