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  • मक्का में गंधक की कमी: लक्षण, कारण और प्रबंधन

    मक्का में गंधक की कमी: लक्षण, कारण और प्रबंधन

    Posted on : 14 Mar 2025 By : Agri Search (India) Pvt. Ltd.

    मक्का (कॉर्न) एक उच्च उत्पादन देने वाली फसल है, जिसे संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है। गंधक (Sulphur) की कमी अब आम होती जा रही है, जिसका मुख्य कारण वातावरण में गंधक का कम होना और असंतुलित उर्वरक प्रबंधन है। समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से उपज की हानि को रोका जा सकता है।

     

    मक्का में गंधक की कमी के लक्षण

     

    नए पत्तों का पीला पड़ना: नाइट्रोजन की कमी पहले पुराने पत्तों को प्रभावित करती है, जबकि गंधक की कमी नए पत्तों में पीलेपन (क्लोरोसिस) का कारण बनती है।

     

    अविकसित पौधे: पौधे कमजोर और पतले तनों वाले होते हैं।

     

    फसल पकने में देरी: फूल बनने और दाने भरने की प्रक्रिया लंबी होती है, जिससे उपज कम होती है।

     

    प्रोटीन की मात्रा में कमी: गंधक की अनुपलब्धता से एमिनो एसिड का संश्लेषण बाधित होता है, जिससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

     

    गंधक की कमी के कारण

     

    जैविक पदार्थ की कमी: जिन मिट्टियों में जैविक पदार्थ (Organic Matter) कम होता है, उनमें गंधक की भी कमी होती है।

     

    लीचिंग (धुलाई प्रभाव): रेतयुक्त मिट्टी और अत्यधिक वर्षा गंधक के सल्फेट रूप को मिट्टी से बहा देती है।

     

    असंतुलित उर्वरक उपयोग: नाइट्रोजन और फास्फोरस का अधिक मात्रा में प्रयोग करने से गंधक की कमी हो जाती है।

     

    वायुमंडलीय गंधक में गिरावट: औद्योगिक उत्सर्जन में कमी के कारण मिट्टी में स्वाभाविक रूप से मिलने वाला गंधक कम हो गया है।

     

    प्रबंधन के उपाय

     

    गंधक युक्त उर्वरकों का प्रयोग: अमोनियम सल्फेट, जिप्सम या एलीमेंटल सल्फर का उपयोग करके गंधक की कमी को दूर किया जा सकता है।

     

    जैविक पदार्थ का समावेश: गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी में गंधक की मात्रा बढ़ती है।

     

    संतुलित उर्वरक प्रबंधन: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और गंधक का उचित अनुपात में उपयोग करके पौधों की वृद्धि सुनिश्चित करें।

     

    मिट्टी परीक्षण: नियमित रूप से मिट्टी की जांच कर गंधक का स्तर निर्धारित करें और उर्वरकों का सही तरीके से उपयोग करें।

     

    फोलियर स्प्रे (पत्तों पर छिड़काव): सल्फेट-आधारित फोलियर स्प्रे से खड़ी फसल में गंधक की कमी को तेजी से ठीक किया जा सकता है।