विभिन्न चट्टानों से बनी मिट्टियाँ – प्रकार और विशेषताएँ
खेती करते समय हम प्रायः उर्वरक, पानी और मौसम पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन इन सभी का आधार मिट्टी होती है। मिट्टी का निर्माण विभिन्न प्रकार की चट्टानों से होता है और उन्हीं के आधार पर मिट्टी के गुण निर्धारित होते हैं। सही फसल चयन और पोषक तत्व प्रबंधन के लिए मिट्टी के प्रकार को समझना बहुत आवश्यक है।
1) आग्नेय चट्टानों से बनी मिट्टी
यह मिट्टी मुख्य रूप से बेसाल्ट चट्टानों से बनती है। महाराष्ट्र की काली मिट्टी इसी वर्ग में आती है। यह मिट्टी गहरी होती है, नमी धारण करने की क्षमता अच्छी होती है और पोटाश, लोहा व मैग्नीशियम से भरपूर होती है। कपास, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और अरहर जैसी फसलों के लिए यह मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
2) अवसादी चट्टानों से बनी मिट्टी
यह मिट्टी नदी किनारे और ढलान वाले क्षेत्रों में पाई जाती है। इसमें गाद की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह हल्की और उपजाऊ होती है। धान, गेहूं, सब्जियाँ, केला और गन्ना जैसी फसलों के लिए यह मिट्टी उपयुक्त होती है।
3) रूपांतरित चट्टानों से बनी मिट्टी
यह मिट्टी कठोर, पथरीली और कम गहराई वाली होती है। इसमें जैविक पदार्थ कम होता है, लेकिन जैविक खाद, कम्पोस्ट और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग से दलहन और मोटे अनाजों की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
4) बलुई एवं लाल मिट्टी
इस मिट्टी में जल निकास अच्छा होता है, लेकिन पोषक तत्वों की कमी रहती है। मूंगफली, मिर्च, दलहन तथा अनार और संतरा जैसी बागवानी फसलों के लिए सही प्रबंधन आवश्यक होता है।
मिट्टी चट्टानों की देन है। मिट्टी की सही पहचान करके फसल और पोषण प्रबंधन किया जाए, तो टिकाऊ और अधिक उत्पादन संभव है।