चिलिंग इंजरी क्या है?
चिलिंग इंजरी तब होती है जब केले को उनके इष्टतम संग्रहण तापमान से नीचे के तापमान में रखा जाता है। यह तनाव फल की बनावट, रंग और स्वाद पर प्रभाव डालता है।
चिलिंग इंजरी के कारण
- कम तापमान: केले उष्णकटिबंधीय फल हैं जो गर्म मौसम में बढ़ते हैं।
- गलत संग्रहण: 13°C से नीचे केले को रेफ्रिजरेटर में रखना अपरिवर्तनीय क्षति का कारण बनता है।
चिलिंग इंजरी के लक्षण
- सतही रंग बदलना: छिलके पर भूरी या धूसर धब्बे दिखाई देना।
- आंतरिक रंग बदलना: मांस का मऊ या पानीदार हो जाना।
- स्वाद का नुकसान: केले का स्वाद खराब या फीका हो सकता है।
पोस्ट-हार्वेस्ट गुणवत्ता पर प्रभाव
चिलिंग इंजरी शेल्फ लाइफ और बाजार में बिक्री क्षमता को कम कर देती है। फल सूक्ष्मजीवों के हमले और सड़न के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
रोकथाम की रणनीतियाँ
- सही तापमान नियंत्रण: सुनिश्चित करें कि केले को 13°C से ऊपर के तापमान पर संग्रहीत किया जाए।
- प्री-कंडिशनिंग: केले के तापमान को धीरे-धीरे समायोजित करें, ताकि उन्हें सीधे ठंडे वातावरण का सामना न करना पड़े।
- पैकेजिंग: परिवहन के लिए इंसुलेटेड पैकेजिंग का उपयोग करें।