नाइट्रोजन स्थिरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वायुमंडलीय नाइट्रोजन (N₂) को एक ऐसे रूप में परिवर्तित किया जाता है जिसे पौधे अवशोषित कर सकें और उपयोग कर सकें, जैसे कि अमोनिया (NH₃), नाइट्रेट (NO₃⁻), या नाइट्राइट (NO₂⁻)। चूँकि पौधे हवा से सीधे नाइट्रोजन का उपयोग नहीं कर सकते, यह प्रक्रिया उनके विकास के लिए आवश्यक है।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण के प्रकार
जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (प्राकृतिक प्रक्रिया)
यह लाभकारी बैक्टीरिया द्वारा किया जाता है, जैसे:
✔️ रायज़ोबियम (फलियां की जड़ों में रहता है)
✔️ अज़ोटोबैक्टर (मिट्टी में स्वतंत्र रूप से रहता है)
✔️ एसीटॉबैक्टर (गन्ने के लिए लाभकारी)
✔️ नील-हरे शैवाल (सायनोबैक्टीरिया)
यह बैक्टीरिया नाइट्रोजन गैस को पौधों के लिए उपलब्ध रूपों में परिवर्तित करते हैं।
वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण
यह स्वाभाविक रूप से बिजली कड़कने के दौरान होता है, जहाँ नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके नाइट्रेट बनाता है, जो बारिश के साथ मिट्टी में गिरता है।
औद्योगिक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (हेबर-बॉश प्रक्रिया)
यह रासायनिक उर्वरक बनाने के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे कि यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
✅ पौधों की स्वस्थ वृद्धि को समर्थन देता है
✅ मृदा की उर्वरता को बढ़ाता है
✅ कृत्रिम नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता को कम करता है
✅ सतत कृषि को बढ़ावा देता है
कृषि में उदाहरण
रायज़ोबियम बैक्टीरिया फलियों की जड़ों में गांठें बनाते हैं और प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं।
एसीटॉबैक्टर गन्ने के पौधों को नाइट्रोजन को सीधे पौधों के ऊतक में स्थिरीकरण करके मदद करता है।