कैल्केरियस मिट्टी (चूना युक्त मिट्टी) – विशेषताएँ, समस्याएँ और वैज्ञानिक सुधार उपाय

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    कैल्केरियस मिट्टी (चूना युक्त मिट्टी) – विशेषताएँ, समस्याएँ और वैज्ञानिक सुधार उपाय

    Posted on : 04 Feb 2026 By : Agri Search (India) Pvt. Ltd

    कैल्केरियस मिट्टी (चूना युक्त मिट्टी) – विशेषताएँ, समस्याएँ और वैज्ञानिक सुधार उपाय

    कृषि में उत्पादन कम होने के पीछे कई बार फसल या उर्वरक नहीं, बल्कि मिट्टी का प्रकार मुख्य कारण होता है। विशेष रूप से कैल्केरियस मिट्टी वाले क्षेत्रों में यदि सही प्रबंधन न किया जाए, तो उर्वरकों का अपेक्षित प्रभाव नहीं मिलता और फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी लगातार दिखाई देती है। इसलिए कैल्केरियस मिट्टी को समझना और उसका सही सुधार करना अत्यंत आवश्यक है।


    कैल्केरियस (Calcareous) मिट्टी क्या होती है?

    जिस मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) की मात्रा अधिक होती है, उसे कैल्केरियस या चूना युक्त मिट्टी कहा जाता है। यह मिट्टी मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में यह मिट्टी बड़े पैमाने पर पाई जाती है।


    कैल्केरियस मिट्टी की प्रमुख विशेषताएँ

    • मिट्टी का pH सामान्यतः 7.5 से 8.5 या उससे अधिक

    • कैल्शियम की मात्रा अधिक, लेकिन आयरन, जिंक, मैंगनीज और फॉस्फोरस की कमी

    • जल निकास अच्छा, परंतु पोषक तत्वों की उपलब्धता कम

    • फसलों में आयरन क्लोरोसिस (पत्तियों का पीला पड़ना) अधिक दिखाई देता है

    • उर्वरकों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता


    कैल्केरियस मिट्टी फसलों के लिए समस्या क्यों बनती है?

    कैल्केरियस मिट्टी में उपस्थित अधिक कैल्शियम कई पोषक तत्वों के साथ अभिक्रिया करके उन्हें अघुलनशील (Insoluble) रूप में बदल देता है। परिणामस्वरूप उर्वरक देने के बावजूद पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध नहीं हो पाते। अंगूर, अनार, केला, सिट्रस, सब्जियाँ और फल फसलों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर होती है। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है, फूल-फल कम लगते हैं और उत्पादन घटता है।


    कैल्केरियस मिट्टी सुधारने के वैज्ञानिक उपाय (Reclamation Practices)

    1) जैविक कार्बन बढ़ाएँ
    गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का नियमित उपयोग मिट्टी की संरचना सुधारता है, सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाता है।

    2) अम्लीय उर्वरकों और जैविक अम्लों का उपयोग
    अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फॉस्फेट, फेरस सल्फेट जैसे उर्वरक मिट्टी का pH कम करने में सहायक होते हैं। इसके साथ-साथ AGRIPLEX-OA जैसे जैविक अम्ल आधारित उत्पाद सिंचाई जल और मिट्टी में मौजूद क्षारों के प्रभाव को कम करते हैं।

    3) सूक्ष्म पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़काव
    आयरन (Fe), जिंक (Zn), मैंगनीज (Mn) को चेलेटेड रूप में पर्णीय छिड़काव द्वारा देने से मिट्टी के उच्च pH की बाधा से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए एक्सीड जैसे उत्पादों का उपयोग।

    4) जैविक घटकों का उपयोग
    फॉस्फेट सॉल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया (Key-Phos), पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया (Key-Potash) और PPFM (ROSIVA) मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ाते हैं और पोषक तत्वों को उपलब्ध रूप में परिवर्तित करते हैं।

    5) सल्फर और सल्फर आधारित उत्पाद
    मूल तत्वीय गंधक (Elemental Sulphur) या सल्फर युक्त उर्वरकों का उपयोग धीरे-धीरे मिट्टी का pH सुधारने में मदद करता है। उदाहरण के लिए थायोग्रीन जैसे उत्पाद।


    निष्कर्ष

     

    कैल्केरियस मिट्टी असफल या अनुपजाऊ मिट्टी नहीं है, बल्कि यह उचित प्रबंधन की आवश्यकता वाली मिट्टी है। जैविक कार्बन बढ़ाकर, सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही उपयोग करके, जैविक इनपुट्स और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर ऐसी मिट्टी में भी उच्च, गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ उत्पादन निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।